आखिरकार हमारी देशभक्ति सिर्फ दो पर्वों में ही सिमट कर क्यों रह गई है।

आज क्यों देश भक्ति केवल राष्ट्र के दो पर्वो में ही सिमट कर रह गई ? इन दोनों पर्वो के अलावा पूरे साल कोई भी न तो देशभक्ति की बात करता और न ही देश के प्रति अपने कर्तव्य का ध्यान करते हुए देश को गुंडो, माफियों, आतंकवादियों तथा भ्रष्टाचारियो से मुक्ति दिलाने के प्रयास करता हैं । क्यों 15 अगस्त और 26 जनवरी को ही देशभक्ति याद आती हैं ? आखिरकार हम पूरे साल देशभक्त जैसा आचरण क्यों नही करते जिससे हम जिस रामराज्य की कल्पना करते हैं वह वाकई में साकार हो सके ।

हम सभी को इस बात पर विचार करना चाहिए। आज स्वतंत्रता के लिए नहीं बल्कि देश के भीतर आतंकवाद एवं भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ना है, और मुखौटा पहने अपनों के खिलाफ लड़ना है। यह लड़ाई और भी ज्यादा गंभीर है क्योंकि इसमें कौन अपना है और कौन पराया, यह समझना मुश्किल है।

आज की इस सदी में देश को देशभक्ति की ज्यादा जरूरत है क्योंकि आज इतना खतरा विदेशियों से नहीं है जितना देश को भ्रष्टाचारियों, अपराधियों, आतंकवादियों व मुखोटा पहने अपनो से हैं । आज हर नागरिक का कर्तव्य बनता हैं कि प्रहरी बनकर इन भ्रष्टाचारियो, आपराधियों तथा आतंकवादियों से देश को मुक्ति दिलाए ।

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