Weather satellite in Earth orbit

आज के समय में मौसम विज्ञानी तूफान और अन्य मौसम सम्बन्धी बदलावों की भविष्यवाणी करने में सक्षम है। हालांकि यह पूर्वानुमान पूरी तरह सही नहीं होता परन्तु आज हम इसके बदौलत पहले से  सतर्क हो जातें हैं। लेकिन 5-जी नेटवर्क के फैलते उन्हें ज्ञात करने में कठिनाई हो सकती हैं। नई फ्रिक्वेंसी मौसम उपग्रहों के कार्य क्षमता को बाधित कर सकतीं हैं।

मौसम पूर्वानुमान आज के समय में पिछले कुछ सालों के मुकाबले काफी सटीक रहा है। इसमें पृथ्वी के चारों तरफ लगे उपग्रहों का बड़ा योगदान है, जो विभिन्न प्रकार के सटीक मौसम डेटा को रिकॉर्ड और वितरित करते रहते हैं। सैटेलाइट द्वारा भेजा डेटा तब मौसम की रिपोर्ट बनाने के लिए कंप्यूटर की मदद से एक पूर्वानुमानित मॉडल बनाया जाता है।

उन डेटा में से एक महत्वपूर्ण भूमिका वायुमंडल में उपस्थित जल वाष्प का स्तर है – वह पानी जो वाष्पित होकर भाप में बदल जाता है, जो व्यावहारिक रूप से अदृश्य बन जाता है। जब वह भाप (एक गैस) ठंडा होता है, तो वह बादल में परिवर्तित हो जातें हैं।

डेटा जितना बेहतर होगा, उतना बेहतर मौसम विज्ञानी तूफान, टाइफून और चक्रवात जैसे तमाम मौसम सम्बन्धी बदलावों का पूर्वानुमान लगा सकते हैं। लेकिन अगर उनके पास अच्छा डेटा नहीं होगा तो उन भविष्यवाणियों में बहुत ज्यादा गलत हो सकती हैं। क्योंकि फ्रिक्वेंसी काफी सेंसिटिव है।

मौसम उपग्रह पैसिव सेंसर का उपयोग कर वायुमंडलीय भाप, या जल वाष्प को मापते हैं। वो सेंसर 23.6 और 24 गीगाहर्ट्ज (GHz) के बीच, एक स्पेक्ट्रल बैंड में जो कि बहुत कमजोर माइक्रोवेव सिग्नल हो उसका का पता लगा सकते हैं।

क्या परेशानियां हैं 5G(फिफ्थ जनरेशन) नेटवर्क से-

5G संचार माध्यम एक नई फ्रिक्वेंसी रेंज का प्रयोग करता है। जो एक प्रभावी और बेहतर संचार माध्यम बनेगा। लेकिन बड़ी फ्रिक्वेंसी के उपयोग के फायदे और नुक्सान दोनों हैं।

5G संचार माध्यम एक ऐसी रेडियो फ्रीक्वेंसी ( 1 GHz-24 GHz से अधिक) का प्रयोग करता है जो कि मौसम विभाग उपग्रहों के रेडियो फ्रीक्वेंसी के काफी करीब है। एक अच्छे 5G संचार माध्यम के लिए जो फ्रिक्वेंसी रेंज प्रयोग होगी वह करीब 24 GHz के आस पास होगी।

उपग्रहों के जल वाष्प के फ्रीक्वेंसी माप का रेंज भी 23.6 और 24 गीगाहर्ट्ज (GHz) के बीच का है, इससे उपग्रहों द्वारा डाटा इकट्ठा करने में परेशानियां खड़ी होगी। वह संचार माध्यम के  फ्रिक्वेंसी से भ्रमित होगा। और इस तरह मौसम विभाग को पूर्वानुमान लगाने में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा।

विज्ञानियों का कहना है कि यह गुणवत्ता को लगभग 77% घटा देगा, जो पूर्वानुमान प्रणाली को काफी पीछे ढकेल देगा। जैसा कि यह लगभग 44 वर्ष पूर्व था।

क्या प्रतिक्रियाएं हैं –

डेटा व्यवधानों के जोखिम को कम करने के प्रयास में, विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) ने कहा है कि 5G ट्रांसमीटरों की ताकत को सीमित रखना होगा। WMO ने प्रस्तावित किया है कि मौसम उपग्रह फ्रिक्वेंसी के करीब चलने वाले सेल टावर-55 dBW (डेसीबल वाट) और डिवाइस -51 dBW तक सीमित उपकरणों पर संचारित करने के लिए निर्धारित होना चाहिए।

बढ़ते तकनीकी और जलवायु परिवर्तन के दौर में हमारे दैनिक जीवन में जरूरत दोनों (5G, Weather forcast) की आवश्यकता है, इसमें नुकसान ना हो यह ध्यान रखते हुए कोई समाधान ढूंढना होगा।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here