Covid-19 का वैश्विक अर्थव्यवस्था एवं जनजीवन पर प्रभाव
Covid-19 का वैश्विक अर्थव्यवस्था एवं जनजीवन पर प्रभाव

Covid-19 (कोरोनावायरस) महामारी विकट रूप धारण कर चुका है। इससे पूरे विश्व में हाहाकार मचा है। स्वयं को शक्तिशाली मानने वाले देश कोरोनावायरस (Covid-19) के सामने टिक नहीं पाये। Covid-19 के कारण प्रबल शक्तिशाली राष्ट्र से लेकर आर्थिक रूप से कमजोर राष्ट्र भी लाक डाउन के दौर से गुजरे हैं।

ऐसे में विश्व अर्थव्यवस्था में बढ़ोत्तरी के दर का गिरना स्वभाविक है। परंतु कोरोनावायरस के दौरान वस्तुओं की मांग एवं आपूर्ति दोनों पर गहरा असर पड़ा है। लगभग सारे उद्योग ठप्प होते हुए हैं। खेती भी बुरी तरह से प्रभावित है। लाक डाउन की स्थिति में उपभोक्ता, उद्योग के कर्मचारी एवं श्रमिक सभी बुरी तरह से प्रभावित है। ऐसे में कर्मचारियों को वेतन चुका पाना, छोटे उद्योगों के लोप होने, तथा विकासशील देशों की अर्थव्यवस्था पर भी गहरा प्रभाव पड़ता है।

भारत की जीडीपी भी प्रभावित हैं। भारत के निजी उद्योगों में कार्य कर रहे बहुत से युवाओं को नौकरियों से हाथ धोना पड़ा है। ऐसे में देश का गरीब वर्ग सबसे अधिक प्रभावित है। देश के किसान, मजदूरों की स्थिति सुधारना भी एक बड़ी चुनौती है। देश के सभी वर्गों में तथा हर प्रकार के कारोबार मुश्किलों के घेरे में है।

भारत की अर्थव्यवस्था कोरोना के पहले से ही चिंताजनक थी। स्वास्थ्य ,महंगाई ,कृषि ,बेरोजगारी सभी की निराशाजनक स्थिति थी। अर्थव्यवस्था को लेकर सरकार पहले से ही घिरी हुई थी। देश की अर्थव्यवस्था व वातावरण को इन विपरीत परिस्थितियो से उभार कर मजबूत करना देश के लिए सरकार की नए नीतियों के गठन की तथा उसके सही ढंग से क्रियान्यवन की जिम्मेदारी बनती है।

वर्तमान में स्वास्थ्य विभाग के दिशा निर्देशों का पालन करते हुए स्वयं के परिवार एवं समाज के अन्य लोगो को जागरूक करने में अपनी भूमिक निभाने की आवश्यकता है।वहीं प्रक्रति का अनावश्यक दोहन भी न हो। इसके लिए जहा घर की साफ सफाई रखना, स्वच्छ कपड़े पहनना, साबुन व सेनेटाइजर से हाथ धोकर भोजन करना, अपने गली मोहहले व नालियों को सेनेटाइज करना आवश्यक है।

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