इंडिया-बांग्लादेश के बीच बहुत सी समानाताएं हैं। चाहे वह सीमाओं की, संस्कृति की, या बोली जाने वाली कुछ भाषाएँ की समानताएं हो। बांग्लादेश के साथ भारत के संबंध भी बहुआयामी रहें हैं, आर्थिक, सांस्कृतिक और सामाजिक क्षेत्रों में।

1965 के इंडो-पाक युद्ध के पश्चात् बहुत सी नीतियों पर रोक लगी। कुछ परिवर्तन समय के साथ हुए परन्तु आवश्यकता एक अच्छे स्तर के संबंधों की है। देखा जाए तो पिछले चार पांच दशक में, दोनों देश अपने संबंधों को मजबूत करने में प्रयासरत रहें हैं।

एसे बहुत से नितियों और ढांचों को बनाने पर जोर दिया गया है जो दोनों देशों के हितों को समान रूप से पूरा करने में सक्षम हो। वास्तव में, भारत पहले पड़ोसी देशों में से एक है, जिसने अपने पड़ोसी देश की क्षमता की पहचान की और 1971 में, स्वतंत्रता के तुरंत बाद देश के साथ राजनयिक संबंध स्थापित करने में पहल की।

इसमें 2011 में एक समन्वित सीमा प्रबंधन योजना (CBMP) शामिल है, ताकि दोनों देशों की सीमा पर अवैध गतिविधियों और अपराधों पर निगरानी और साथ ही भारत-बांग्लादेश सीमा के साथ शांति और रखरखाव के लिए दोनों देशों की सीमा संरक्षक बलों के प्रयासों को समेकित हो।

बीते दिनों, दोनों देशों के बीच व्यापार संबंधों को लेकर दोनों देशों में नियमित यात्राएं हों या उच्च स्तरीय वार्ता और विमर्श, प्रधान मंत्री मोदी और बांग्लादेशी प्रधान मंत्री शेख हसीना द्वारा प्रयास किया जाता रहा है। परिणामस्वरूप देशों के बीच आपसी सहयोग के नए घटनाक्रम आगे बढ़े हैं, जिनमें पड़ोसियों के बीच समुद्री सहयोगिता को मजबूत करना भी है।

बांग्लादेश के साथ समुद्री संबंधों में एक नया अध्याय जुड़ा (बांग्लादेश दक्षिण एशिया में भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है), दोनों देशों के बीच बहुत से सौदों और समझौते पर हस्ताक्षर किए गए हैं।

बांग्लादेश के विकास और समर्थन को बढ़ावा करना हमेशा भारत की “पड़ोसी नीति” का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। BIMSTEC (Bay of Bengal Initiative for multi-sectoral technical and economic cooperation) और हिंद महासागर रिम एसोसिएशन (IORA) में शामिल देश पड़ोसि देशों के बीच सहभागिता को मजबूत करने के लिए बेहद योगदान देतें हैं।

द्विपक्षीय संयुक्त नदी आयोग, कर्तव्य रियायतें और व्यापार के लिए सब्सिडी, टैरिफ के लिए खाते में कमी आई है जो कुछ महत्वपूर्ण समझौते हैं जो देशों के बीच सहयोगियों के प्रतिबिंबित हैं।

बांग्लादेश को विकास और समर्थन पर ध्यान केंद्रित करना हमेशा भारत की “पड़ोसी नीति” का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है, और बिम्सटेक (बहु-क्षेत्रीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग के लिए बंगाल पहल की खाड़ी) और हिंद महासागर रिम एसोसिएशन (आईओआरए) में देश का हिस्सा है, जो मजबूत करने के लिए काफी योगदान देता है

जब भी अंतरराष्ट्रीय मुद्दों की बात आती है तो भारत और बांग्लादेश दोनों अक्सर एक ही पृष्ठ पर खड़े होते हैं। दोनों पड़ोसी एक दूसरे के द्वारा किए गए निर्णयों की सराहना भी करते हैं।

हाल ही में, भारतीय विदेश मंत्रालय ने बताया कि पहला कंटेनर कार्गो जो कोलकाता से चलकर बांग्लादेश में चट्टोग्राम बंदरगाह के माध्यम से त्रिपुरा की राजधानी अगरतला पहुंच गया है।

MEA प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने बताया कि इसकी साथ, भारत के लिए माल के परिवहन में तय की जाने वाली दूरी और समय, विशेष रूप से उत्तर-पूर्वी राज्यों के लिए कम हो जाएगा। उन्होंने कहा- ” इससे बांग्लादेश में व्यापार सेवाओं और राजस्व उत्पादन में वृद्धि करेगा”। एक मीडिया ब्रीफिंग में, अनुराग श्रीवास्तव ने यह भी कहा कि यह दोनों देशों के द्विपक्षीय कनेक्टिविटी को और मजबूत करने की दिशा में और पारस्परिक रूप से लाभकारी साझेदारी है। जिसका उद्देश्य दोनों पक्षों के लोगों को लाभान्वित करना है।

यह ध्यान देने वाली बात है कि कागज़ी कार्यवाही तो पहले से चल रही थी, यह पहल उन नितियों का ज़मीनी स्तर पर क्रियान्वयन का संकेत देता है। जो स्पष्ट रूप से आने वाले समय में दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं को सुदृढ़ करने में मदद करेगा।

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