विश्वगुरु भारत बनाने की ओर अग्रसर भारत की विवेचना
विश्वगुरु भारत बनाने की ओर अग्रसर भारत की विवेचना

भारत विश्वगुरु के स्थान पर आसीन होने के लिए निरंतर प्रयासरत है। ऐसा हम हमेशा से सुनते आए हैं, ’19वीं सदी ग्रेट ब्रिटेन का था, 20वीं सदी अमेरिका का था तो 21वीं सदी भारत का होगा।

कैसा होगा विश्वगुरु भारत-

जहां जीडीपी संतुलित हो,रोजगार के पर्याप्त अवसर हों तो कोई भी राष्ट्र आर्थिक तरक्की पर होगा। अगर किसानों की स्थिति संतुलित हो, युवाओं को प्रतिभा के अनुसार काम मिल रहा हो, मीडिया स्वतंत्र हो,इंसान में मानवता हो, जनता में संविधान के प्रति आत्मीयता हो, कानून के प्रति सम्मान हो ,मजदूरों की जिंदगी बेहतर हो ,शिक्षा, स्वास्थ आम जनता को आसानी से उपलब्ध हो तो राष्ट्र आदर्श राष्ट्र के रूप में स्थापित हो जाता है। वह पूरे दुनिया के लिए मार्गदर्शन की भूमिका में होता है।

इन सबके बीच विश्वगुरु की ओर अग्रसर निरंतर प्रयास से प्राप्त स्थिति की विवेचना करना बेहद आवश्यक है-

भारत में महिलाओं का यौन शोषण साधारणतः सामान्य बात है। द हिंदू के रिपोर्ट 2018 के अनुसार, महिलाओं के खिलाफ देश में अपराध के कुल 3,78,277 मामले दर्ज किए गए हैं। बलात्कार से संबंधित मामलों में सजा की दर 27.2% थी जबकि बलात्कार के मामले में चार्जशीट दाखिल करने की दर 85.3% थी । पति, रिश्तेदारों द्वारा महिलाओं के खिलाफ क्रूरता की दर 31.9% रही।

2018 में कुल 50,74,634 संज्ञेय अपराध दर्ज किए गए। वर्ष 2018 में लगभग 11000 लोगों ने आत्महत्या की जिसमें 6000 किसान 5000 खेतिहर मजदूर शामिल है।2018 में ही आत्महत्या करने वालों की कुल संख्या 1,34,516 थी। वर्ष 2018 में हत्या के कुल 30000 मामले दर्ज किए गए।

साइबर अपराध के भी 28000 मामले दर्ज किए गए। भारतीय हिंसा में दहेज का भी बड़ा योगदान है। लूट ,मर्डर, हत्या ,बलात्कार, अपहरण के बाद थाने रिश्वतखोरी के गढ़ बन चुके हैं। भारत में 10 लाख लोगों पर मात्र 17 जज है। पूरी न्याय व्यवस्था धारासाही है।

कहीं अदालतों के फैसले आने में कई साल लग जाते हैं तो कहीं अदालतों में फैसले नीलाम हो रहे हैं। धर्म – जाति के नाम पर व्यक्ति इतना बटा हुआ है की व्यक्तियों के दिलों में नफरत की आग जल रही है।

युवा भारी – भरकम संख्या में बेरोजगार हो रहा है। किसान आए दिन आंदोलन और आत्महत्या कर रहे हैं। पूरा सरकारी सेक्टर तबाह है। सरकारी स्कूलों में शिक्षा चौपट है प्राइवेट स्कूल इतने महंगे हैं कि देश का गरीब एवं मध्यम वर्ग सहन नहीं कर सकता। उच्च शिक्षा की हालत बहुत नाजुक है। दुनिया के 300 विश्वविद्यालयों में भारत का कोई विश्वविद्यालय नहीं आता ।

बहुत बड़ी जनसंख्या वाला देश होने के नाते स्वास्थ्य व्यवस्था को सुदृढ़ होना चाहिए। सरकारी अस्पतालों में सुविधाओं का घोर अभाव है। सरकारी रिपोर्ट के अनुसार 1445 लोगों पर मात्र एक डॉक्टर हैं।

यूएनयू की रिसर्च के मुताबिक विश्व बैंक के आय के मानकों के अनुसार भारत में अभी करीब 81.2 करोड़ लोग गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन कर रहे हैं जो देश की कुल आबादी का 60 प्रतिशत है। दैनिक जागरण के अनुसार सात करोड़ शहरी भारतीय मलिन बस्तियों में रहते हैं ।

ना हीं यहां कानून का बहुत ज्यादा खौफ है और ना हीं संविधान के प्रति बहुत ज्यादा सम्मान। जनता बहुत ही ज्यादा अनुशासन हीन है। ऐसे में विचारणीय है कि कमी कहां है? क्या इन हालातों के बदौलत भारत विश्वगुरु बन सकता है।

दोष समय का है या सरकार का या स्वयं का, यह विवेचना का विषय है। समृद्धशाली इतिहास की गाथा गाने मात्र से कुछ नहीं हो सकता। समय पर विवेचना करके हालातों को नियंत्रित नहीं किया गया तो ऐतिहासिक पतन सुनिश्चित है।

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