राजनीति की वजह से गरीबों का शोषण कब तक
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देश में इस समय महामारी की वजह से सभी चीजें बंद पड़ी है वही कुछ लोगों की राजनीति चमकाने के चक्कर में गरीब वर्ग, पिछड़ा वर्ग और समाज के वह वर्ग जो रोजमर्रा की जरूरतें रोज की कमाई से पूरी करते हैं उनका क्या ?

बात करते हैं आसपास की गरीब बस्तियों की तो आपको एक नहीं 1000 एग्जांपल मिल जाएंगे । जहां कुछ लोगों के लिए सरकारी व्यवस्थाएं इतनी तंदुरुस्त हैं की जिनकी इनकम लाखों में है उन्हें रोटी रुपए ₹2 में मिल जाती है लेकिन वही बहुत ऐसे वर्ग हैं जिन्हें रोटी जैसे बेसिक नीड वाली वस्तु पर भी टैक्स देना पड़ता है ।

यह माना जा सकता है कि सरकार के सारे खर्च का कुछ हिस्सा या फिर बहुत सारा हिस्सा कह लीजिए टैक्स से आता है लेकिन इसका तात्पर्य बिल्कुल यह नहीं है की गरीब जनता को सूचित किया जाए जहां इस महामारी में बहुत लोगों की नौकरी जा चुकी है पेसे बंद हो चुके हैं वहीं दूसरी ओर गरीबी की मार झेल रहे लोगों पर सरकार की निगाहें शायद नहीं जा रही हैं ।

रोज सरकारी योजनाओं की घोषणा होती है लेकिन वह योजनाएं कागज और फाइलों में दबकर मर जाती हैं और बच जाता है तो केवल गरीब जनता का हाल जो दिन-ब-दिन बद से बदतर होता जा रहा है ।

सरकारी विभाग अपनी लापरवाही से बाज आने को तैयार नहीं है करप्शन अपनी चरम सीमा पर आ चुका है कितना भी कोई दिंगे हाक ले । जमीन की सच्चाई क्या है यह सबको पता है । प्याज करी मजदूर और मिडिल क्लास फैमिली संघर्ष कर रहे हैं कि वह कैसे अपनी बेसिक नीड को पूरा करें वही सरकारी तंत्र फैसले लिया जा रहा है लेकिन परिणाम शून्य दिख रहे हैं ।

न्यूज़ का काम है सरकार का फोकस कराना और हम उस उद्देश्य से अपनी बातों को और सच्चाई को सभी के पास पहुंचा रहे हैं ।

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