Thousands-joined-the-Paris-march-saying-they-were-fed-up-with-anti-Muslim-discrimination
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इस्लाम एकेश्वरवादी एवं हजरत मोहम्मद के द्वारा मनुष्य को दी गई किताब क़ुरआन की शिक्षा पर आधारित है। जिसका मुख्य उद्देश्य अमन, शांति है। इस्लाम विश्व का दूसरा सबसे बड़ा धार्मिक समूह है। 2015 के एक अध्ययन के अनुसार इस्लाम के 1.7 बिलियन अनुयायी है। पर आज इस्लाम के अनुयायियों, ठेकेदारों के क्रियाकलापों से दुनिया इस्लाम को नफरत भरी निगाहों से देखने लगी है। आज दुनिया के लगभग सभी इस्लामिक देश अशांत है। आए दिन बमबारी की घटना को अंजाम दिया जा रहा है, मस्जिदे तबाह की जा रही है। तमाम इस्लामिक संगठन जिहाद के नाम पर आतंक फैला रहे हैं। फ्रांस के शिक्षक सेनुअल पेटी का गला काट कर हत्या कर दिया गया।

फ्रांसीसी राष्ट्रपति ने इस वारदात को इस्लामी आतंकवाद से जोड़ा है। इस्लामी आतंकवाद की जांच के लिए फ्रांस ने मस्जिदों, घरों, व्यवसायिक संस्थानों समेत करीब 120 से ज्यादा जगहों पर बड़े स्तर पर सर्विलांस कार्यक्रम चलाया हुआ है। अमेरिका समेत कई बड़े देशों के इस्लामिक मुल्कों से अच्छे रिश्ते नहीं हैं। निश्चित रूप से वर्तमान समय में इस्लाम में उदारवाद का पराभव हुआ है। जिसके कारण इस्लामोफोबिया आज बहुत प्रचलन में है। लोगों के दिलों में इस्लाम को मानने वाले हर मुसलमान के लिए एक हिंसा, भय, घृणा ,और भेदभाव को ही इस्लामोफोबिया कहते हैं। आज हिंदुस्तान में हिंदुत्व की राजनीति चलन में है।

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राजनीतिक समीकरण संतुलित करने के उद्देश्य से हिंदुत्व को सियासत के अनुसार परिभाषित किया जा रहा है। जबकि हिंदुत्व विभिन्न संस्कृतियों का संगम है जिसमें शैव, वैष्णव समेत तमाम संस्कृतिया समाहित है। दुनिया में हिंदू धर्म एवं हिंदू संस्कृति की बहुत इज्जत है। हिंदू धर्म को शांति प्रिय एवं मानवीय मूल्यों वाला धर्म माना जाता है जहां सदाचार, सच्चाई, ईमानदारी, नैतिकता कर्तव्य बोध एवं ज्ञान है। पर आज राजनीतिक ठेकेदारों द्वारा हिंदुत्व के नाम पर लिंचिंग जैसी घटनाओं को अंजाम दिया जा रहा है। हिंसा फैलाने की कोशिश है।

हिंदुत्व के नाम पर दिमाग को इतना भ्रमित किया जा रहा है कि कपिल गुर्जर, गोपाल एवं हिंदुत्व के नाम पर हिंसा एवं नफरत फैलाने वाले लोग हिंदुत्व को भी इस्लामोफोबिया की तरह स्थापित कर देंगे। यदि धर्म एवं जाति के नाम पर भेदभाव जारी रहा, धार्मिक उन्माद के कारण हिंसा के मंजर स्थापित हुए अगर भगवा से भय व्याप्त हुआ तो हिंदूफोबिया भी प्रचलन में आ जाएगा।

धर्म इंसान बनाने की पद्धत है।धार्मिक ग्रंथ जीवन में सदाचार एवं मानवीय मूल्यों का प्रवाह करते हैं। किसी भी धर्म में हिंसा भय को स्थान नहीं है। कोई भी धर्म चोरी अराजकता की सीख नहीं देता। धर्म को समझने की जरूरत है। धार्मिक ग्रंथों को पढ़ने की जरूरत है। दूसरे धार्मिक समूह के लोगों पर कीचड़ उछालने से ज्यादा बेहतर अपनें- अपनें धर्मों के गलत लोगों के ऊपर से पर्दा उठाना धार्मिक समूहों को ज्यादा मजबूती देगा।

अगर हिंदू धर्म के अनुयायियों में कर्तव्य बोध की कमी है, भ्रष्टाचार है, अराजकता है तो पर्दा हटाना हिंदू धर्म के लोगों की ही जिम्मेदारी है। इस्लाम में कट्टरता बहुत बड़ी समस्या है तो उदारवाद ही विकल्प है। और इस बड़ी समस्या से इस्लाम को खुद ही लड़ना पड़ेगा क्योंकि यह इस्लाम के अंदर ही है और इससे अंदर वाले ही लड़ सकते हैं। और जिस दिन कट्टरता खत्म हो गई उसी दिन इस्लामोफोबिया स्वत: समाप्त हो जाएगा।

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