समाजवाद की वैज्ञानिक नींव कायम करने वाले कार्ल मार्क्स
समाजवाद की वैज्ञानिक नींव कायम करने वाले कार्ल मार्क्स

समाजवाद की वैज्ञानिक नींव कायम करने और पीड़ितों- शोषितो तथा मजदूर किसानों के अंतरराष्ट्रीय आंदोलन को चलाने के लिए आजीवन संघर्ष करते हुए मार्क्स ने अनेकों ग्रंथ लिखे। जर्मनी के छोटे से नगर ट्रेयर में जन्मे मार्क्स जिसे क्रांतिकारी विचारों के कारण जर्मनी, फ्रांस, बेल्जियम, इत्यादि बहुत से देशों से निकाल दिया गया।

मार्क्स को भारत में विशेष तवज्जो नहीं दिया जाता क्योंकि मार्क्स विदेशी थे तो थॉमस अल्वा एडिसन, विलिस कैरियर, अलेक्जेंडर ग्राहम बेल, कार्ल बेंज, आदि सभी विदेशी थे। पर आज पूरा संसार बल्ब, एयर कंडीशन, टेलीफोन, मोटर वाहन का उपयोग कर रहा है। महापुरुष किसी निश्चित मुल्क का नहीं होता वह सारे देशों का होता है जिससे सारी दुनिया प्रकाशित होती है।

मार्क्स महापुरुष थे। मार्क्स 34 बरस इंग्लैंड में गुमनाम बनकर रहे, संसार के सबसे बड़े पुस्तकालय ब्रिटिश म्यूजियम में बैठकर अध्ययन किया, भूखे पेट किताबें लिखी और भविष्य के क्रांति के मार्ग को प्रशस्त किया।

समाजवाद की वैज्ञानिक नींव कायम करने वाले कार्ल मार्क्स

मार्क्स नें पर्याप्त धन कमाने को विशेष महत्व नहीं दिया। लेखों और पुस्तकों के लिखाई के पैसों से आवश्यकताएं और कुछ शौक पूरा किया। शराब और शिगार का भी उपयोग किया। इतना भी धन इकट्ठा नहीं कर सके कि बीमार लड़की को जिंदा बचा पाए।

इन सब के बावजूद मार्क्स के पत्नी जेनी को विश्वास था की बेहद कठिन मुसीबतों के बावजूद मार्क्स जिस महान कार्य की नीव डाल रहे हैं। वह निश्चित संसार के पीड़ितों के दुख दूर करने का साधन बनेगा। मार्क्स की कम्युनिस्ट मेनिफेस्टो प्रकाशित होने का इतना प्रभाव पड़ा कि पेरिस के क्रांतिकारियों ने समाजवादी सरकार ‘पेरिस कम्यून’ की स्थापना कर डाली। समाजवाद में मार्क्स का काफी योगदान है।

कार्ल मार्क्स के इस घोषणापत्र का प्रभाव संसार भर के मजदूर आंदोलनों पर पड़ा। और मजदूरों के आंदोलन ने अंतरराष्ट्रीय रूप धारण कर लिया। और मजदूरों में एक नई भावना श्रेणी चेतना(class consciousness) पनफी। कार्ल मार्क्स ने अर्थशास्त्र के गहरे अध्ययन से एक नई पद्धति कायम कर दी। जिसे वर्गवाद या समष्टिवादी (communist) अर्थशास्त्र कह सकते हैं। जिसके सामने पूंजीवादी अर्थशास्त्र बौना है। इस अर्थशास्त्र के अनुसार मनुष्य समाज का ढांचा और दृष्टिकोण बिल्कुल बदल जाता है।

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