आइए जानते हैं क्या है शिक्षा का सही महत्व ?

लंबे अर्से के बाद राष्ट्र के लिए नई शिक्षा नीति का आना सर्वथा स्वागत योग्य है । इस शिक्षा नीति में समाज और राष्ट्र के सक्षम जो प्रत्यक्ष चुनौतियां हैं उनका सामना करने के अच्छे ढंग से चिंता की गई है। नौजवान को अपने ही देश में पूरी सुविधा मिल सके इस बात का भी पूरा ध्यान रखा गया है । परंतु शिक्षा का मूल उद्देश्य क्या है ? किसी भी प्रकार की शिक्षा पाने वाले नौजवान को पहले व्यक्ति बनना आवश्यक है, उसे सच्चरित्र तथा स्वस्थ मस्तिष्क वाला नागरिक बनना अधिक आवश्यक है । परंतु आज का नागरिक केवल डॉक्टर, इंजीनियर और नौकरियों तक ही सीमित रह गया है और अपनी चारित्रिक कमियों के कारण वह देश के बहुत कम काम आ पाता है। शिक्षा का मूल उद्देश्य चरित्र निर्माण करना है।

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इसके लिए हमें अपनी पुरानी शिक्षा पद्धति की ओर मुड़कर देखना होगा। हमें व्यक्तित्व निर्माण तथा चरित्र निर्माण पर बल देना होगा । हमारे संस्कार और परंपराए अब सीमित ही जगहों बचे हैं । प्रत्येक छात्र को एक दिन किसी ऐसे जगह पर जरूर व्यतीत करना चाहिए जहां पर जाकर उसे समाज की समझ हो, चीज़ों की समझ आये और उसका चरित्र एवं व्यक्तित्व का सार्वांगीण विकास हो । यदि हमारा नौजवान अपनी मिट्टी से दूर भागता है, मिट्टी में लौटने में अपना अपमान मानता है तो वह देश के लिए संभवत कुछ नहीं कर सकता ।

“माता भूमि: पुत्रोहं प्रथ्वया” भूमि हमारी माता हैं और हम इस पृथ्वी के पुत्र हैं, तब वेद के पन्नों में ही लिखा जाएगा । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वच्छता के लिए हाथ में झाड़ू पकड़कर जो संदेश दिया है वह संदेश हर नागरिक के दिल में बसना चाहिए । इसे राजनीतिक रूप से न देख कर इसे सामाजिक रूप से देखना जरूरी है । आज के इस बदलते दौर में हमें अपनी संस्कृति को नहीं भूलना चाहिए । इस बदली शिक्षा नीति के साथ-साथ हमे एक आदर्श एवं चरित्रवान व्यक्ति बनना होगा । क्योंकि बिना चरित्र के ज्ञान अधूरा है।

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