प्रकृति सभी के लिए एक अनमोल उपहार है ।

प्रकृति सभी के लिए एक अनमोल उपहार है। जब इंसान या कोई जीव अपने को अकेला पाता है, तो प्रकृति उसे अकेलेपन से दूर करती है।

प्रकृति के लिए इंसान की सोच – इंसान प्रकृति को उपहार जरूर मानता है लेकिन उस उपहार की कद्र करना वो भूल जाता है। जैसे अधिकता के मात्रा में इंसान किसी चीज की वैल्यू भूल जाता है।

प्रकृति के लिए जीव जंतुओं की सोच

वैसे तो जीव जंतु बोल नहीं सकते लेकिन ऐसा भी नहीं कि उन्हें बिल्कुल किसी चीज का अहसास नहीं है वो समझते है प्रकृति ने उन्हें क्या दिया है इसलिए वो प्रकृति को कभी नुकसान नहीं पहुंचाते ।

प्रकृति के बिना जीवन की उम्मीद

अगर कोई ये सोच ले की प्रकृति के बिना वो जीवित रह पाएगा तो वह इंसान बहुत बड़े भ्रम में है आज के तकनीक कि दुनिया भले ही आगे हो गई हो लेकिन हम अपने मूलभूत जरूरत के लिए प्रकृति पर ही निर्भर है ।

इंसान से प्रकृति को नुकसान

इंसान अपनी जीवन की कल्पना जब करता है तो वो प्रकृति को पहले नुकसान ही पहुंचता है उसे प्रकृति से बहुत कुछ चाहिए लेकिन प्रकृति का पालन पोषण नहीं करता । वो हर चीज को दूषित करते जा रहा है ।

हमारी क्या जिम्मेदारियां है प्रकृति के प्रति

वैसे तो हमारी प्रकृति के प्रति अनेकों जिम्मेदारियां है। अगर हम प्रकृति कि देखभाल के लिए पेड़ पौधे नहीं लगा सकते तो कम से कम प्रकृति को नुकसान नहीं पहुंचाना चाहिए।

  • वैसे तो जीवन के लिए महत्वपूर्ण है ऑक्सीज लेकिन हम उसमे भी पॉल्यूशन का जहर घोलते है ।
  • जीवन के लिए जरूरी है पानी , फल , फूल और खेतों के अनाज लेकिन हम उससे भी नहीं छोड़ते ।
  • जीवन को आनंद से भरने के लिए, मौसम का मिजाज सही होना चाहिए। लेकिन हम मौसम को भी नहीं छोड़ते।
  • नल कूप, जलाशय जरूरी है लेकिन हमने उसका भी दोहन कर ख़तम कर दिया ।

खुद विचार कीजिए अभी, नहीं तो फ्यूचर में शायद कोई विचार ना करने योग्य बचे ।

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