नोबेल पुरस्कार 2020 : दो अमेरिकी वैज्ञानिकों समेत एक ब्रिटिश वैज्ञानिक को हेपेटाइटिस-सी के वायरस की खोज के लिए चिकित्सा का नोबल
नोबेल पुरस्कार 2020 : दो अमेरिकी वैज्ञानिकों समेत एक ब्रिटिश वैज्ञानिक को हेपेटाइटिस-सी के वायरस की खोज के लिए चिकित्सा का नोबल

प्रतिष्ठित नोबेल पुरस्कारों की लिस्ट में इस साल पहली घोषणा चिकित्सा के क्षेत्र के लिए हुई। इस वर्ष के चिकित्सा के नोबेल को तीन वैज्ञानिकों हार्वे जे. अल्टर, माइकल ह्यूटन और चार्ल्स एम. राईस को संयुक्त रूप से देने का फैसला किया गया है। इसकी घोषणा मध्य यूरोपीय ग्रीष्मकालीन समय (CEST) के अनुसार नोबेल समिति (Karolinska Institutet for the Nobel Prize in Physiology or Medicine) के द्वारा 11:30 AM पर की गई।

नोबेल पुरस्कार के रूप में प्राप्त नौ मिलियन स्वीडिश क्रोनर (1,006,785 USD या भारतीय रुपए में 7.38 करोड़) की राशि को यह वैज्ञानिक आपस में साझा करेंगे। शरीर-क्रिया विज्ञान या चिकित्सा (Nobel Prize in Physiology or Medicine) का नोबेल पुरस्कार प्रत्येक वर्ष जीवन विज्ञान (Life Sciences) और चिकित्सा (Medicine) के क्षेत्र में श्रेष्ठ खोज करने वाले वैज्ञानिकों या संस्थाओं को प्रदान किया जाता है। हेपेटाइटिस-C के वायरस की खोज के लिए इन्हें इस बार पुरस्कार के लिए चुना गया है।

न्यूयॉर्क में जन्मे हार्वे जे. अल्टर नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ में अपनी सेवाएं दे रहे हैं, तथा ब्रिटिश वैज्ञानिक माइकल ह्यूटन वर्तमान में यूनिवर्सिटी ऑफ अल्बर्टा में कार्यरत हैं व चार्ल्स एम. राईस का जन्म कैलिफोर्निया में हुआ था तथा वे इस समय रॉकफेलर यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर हैं।

यह पुरस्कार इन तीन वैज्ञानिकों को रक्त जनित हेपेटाइटिस के खिलाफ निर्णायक लड़ाई में योगदान के लिए दिया गया है जो कि एक प्रमुख स्वास्थ्य समस्या है जो दुनिया भर के लोगों में यकृत सिरोसिस और यकृत कैंसर का कारण बनती है। WHO के आंकड़ों के अनुसार प्रतिवर्ष 70 मिलियन लोग हेपिटाइटिस-C से संक्रमित होते हैं, तथा 400000 लोगों की जान प्रतिवर्ष इससे चली जाती है।

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इन वैज्ञानिकों की खोजों के कारण ही हेपिटाइटिस सी वायरस की पहचान हुई । इससे पहले हेपेटाइटिस-ए और हेपेटाइटिस-बी की खोज आगे बढ़ चुकी थी लेकिन अभी भी अधिकांश रक्त जनित हेपेटाइटिस के मामलों में अस्पष्टता थी। हेपिटाइटिस सी वायरस की खोज ने क्रोनिक हेपेटाइटिस के शेष मामलों के कारण का पता लगाया और रक्त परीक्षण तथा नई दवाओं के निर्माण को संभव बनाया जिसने लाखों लोगों की जान बचाई है। इससे पहले सन् 1976 में अमेरिकी वैज्ञानिक डॉ. ब्लूमबर्ग को हेपेटाइटिस-बी के वायरस की खोज के लिए चिकित्सा का नोबेल पुरस्कार दिया जा चुका है।

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इस वर्ष 5-12 अक्टूबर तक इन छह क्षेत्रों (चिकित्सा,भौतिकी, रसायन,साहित्य,शांति एवं अर्थशास्त्र) के लिए नोबेल पुरस्कारों की घोषणा की जाएगी, जो इन क्षेत्रों में दिया जाने वाला सर्वोच्च पुरस्कार है। यह पुरस्कार हर वर्ष 10 दिसंबर (स्वीडिश रसायनज्ञ अल्फ्रेड नोबेल की पुण्यतिथि) को स्वीडन के स्टॉकहोम में आयोजित एक समारोह में प्रस्तुत किया जाता है। जबकि शांति का नोबेल नॉर्वे के ओस्लो नमक शहर में दिया जाता है।

नोबेल फाउंडेशन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी लार्स हेइकेनस्टेन ने एक टीवी इंटरव्यू के दौरान बताया कि वर्तमान कोविड-19 महामारी की वजह से इस वर्ष नोबेल पुरस्कार समारोह का आयोजन ऑनलाइन किया जाएगा।

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