हमारे देश में स्थानीय खिलौनों की समृद्ध परंपरा रही है।
मन की बात : वाराणसी के खिलौना कारीगरों की

इस बार ‘मन की बात’ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत को खिलौनों के क्षेत्र मे आगे बढ़ कर उसे स्वदेसी बनाने की बात की थी। जो देखा जाए तो एक अच्छे सोच को दिखाता है, जिससे न सिर्फ हमारे कारीगरों को मदद मिलेगी बल्कि अर्थव्यवस्था पर भी एक पॉज़िटिव प्रभाव पड़ेगा। पर यह कहने और इसे जमीनी स्तर पर प्रभावी बनाना दो अलग अलग बातें हैं।

आज देश में एक धीमी मौत मर रहा, लकड़ी के खिलौना शिल्प और कारीगरों की दशा भी दयनीय है। बड़ी बाते करने से अगर पेट भर जाता तो आज भारत में भुखमरी इस कगार पे न होती। वाराणसी के कश्मीरीगंज और खोजवा क्षेत्रों में रहने वाले लगभग 500 कारीगरों को अपना माल बेचने में मुश्किल हो रहा है।

लकड़ी के खिलौने की मांग में लगातार गिरावट के अलावा, इस व्यवसाय को प्रभावित करने वाले अन्य कारकों में लकड़ी की उच्च लागत, लकड़ी के शिल्प वस्तुओं को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा अपर्याप्त सहायता और अंत में सस्ते चीनी खिलौनों की बाजार मे सुगमता है जो आज बच्चों में बहुत लोकप्रिय हैं।

वाराणसी में खिलौना निर्माता कहते हैं कि वे ‘मन की बात’ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलौना कारीगरों के उल्लेख से उत्साहित हैं और सरकार से उम्मीद करते हैं कि वे भारतीय खिलौनों की बिक्री को बढ़ावा देने के लिए और कदम उठाएंगे। वाराणसी संयोग से एक खिलौना बनाने वाला हब और साथ ही साथ प्रधानमंत्री का निर्वाचन क्षेत्र भी है।

“जो खिलौने हम बनाते हैं, उनकी बाजार में सराहना की जाती है। हम चाहते हैं कि मोदीजी हमें सस्ती कीमत पर बिजली उपलब्ध कराएं। आगे, सरकार को व्यवसाय के विपणन भाग का ध्यान रखना चाहिए, ताकि बिक्री को बढ़ावा मिल सके,” वोहराज सिंह एक कारीगर ने एएनआई (ANI) को बताया।

इस बीच, लॉक डाउन के चलते सभी व्यवसायों पर प्रभाव पड़ा है, यहाँ कारखाने के अन्य कारीगरों ने कहा कि उनके व्यवसाय पर भी तालाबंदी का गहरा असर पड़ा है और वह चाहते हैं कि सरकार और अधिक सहायता प्रदान करे।

“लॉकडाउन ने हमारे व्यवसाय को प्रभावित किया था, इसलिए ऑर्डर कम हो गए थे। उद्योग वैसे भी वर्षों से गिरावट (डाउनहिल ) पर था। इन दिनों लकड़ी की कीमत बहुत अधिक है, हमें खिलौनों के बेहतर निर्माण के लिए कोरैया के पेड़ की लकड़ी की भी आवश्यकता है। जिस पर प्रतिबंध के कारण हम इसका उपयोग नहीं कर सकते हैं। ” रामू सिंह (एक अन्य कारीगर) ने कहा।

पीएम मोदी ने रविवार को अपने मासिक “मन की बात” रेडियो कार्यक्रम के दौरान, “दुनिया के लिए खिलौने” बनाने के बारे में बात की और भारत को “खिलौना हब” बनने की क्षमता पर प्रकाश डाला।

“हमारे देश में स्थानीय खिलौनों की समृद्ध परंपरा रही है। कई प्रतिभाशाली और कुशल कारीगर हैं, जिनके पास अच्छे खिलौने बनाने में विशेषज्ञता है। खिलौने बच्चों के विकास के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं। यहां तक ​​कि रवींद्रनाथ टैगोर ने भी खिलौनों के महत्व के बारे में बताया है। भारत में पूरी दुनिया के लिए खिलौने बनाने की क्षमता और खिलौना हब बनने की क्षमता है, “प्रधान मंत्री ने कहा था।

अब प्रधानमंत्री ने तो अपने मन की बात कर ली, जरूरत है तो इन कारीगरों के मन की बात सुनने जो। जिनके बेहतरी के बगैर भारत को “खिलौना हब” बनाने की बात खोंखली है। इनकी मूलभूत सुविधाओं पर ध्यान केन्द्रित करना होगा, जिसमे बिजली, कच्चा माल, और बाजार मे सामानो की सुगमता आदि हैं।

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