जनसंख्या वृद्धि : एक विकट समस्या, और कई और समस्याओं का कारण

हमारा देश इस समय कई समस्याओं से जूझ रहा है। कोरोना वायरस जैसी जानलेवा महामारी जिसने पूरी दुनिया को घुटनों के बल ला खड़ा कर दिया हैं। इस महामारी के कारण जीवन यापन करना दुर्लभ हो रहा हैं। इस समय कोरोना से ही नही बल्कि लगभग हर राज्य बाढ़ से भी जूझ रहा है। जिसमें लोगों के घर बर्बाद हो गए हैं, फसलें चौपट हो गई है और बाढ़ के कारण जानवर और मनुष्यों की मृत्यु भी हो रही है और बीमारियों के फैलने का खतरा भी बढ़ रहा है।  

ऐसी स्थिति में सरकार के सामने भी अनेक समस्याएं आ खड़ी है कि वो बाढ़ पीड़ितों के घर बनवाए या मृत्यु होने पर उन्हें मुआवजा दें। अगर गौर करें तो पाएंगे कि जनसंख्या में वृद्धि इन सभी समस्याओं के करणों मे से एक है। मौसम का बदलाव जो विचित्र हो रहा है इसका कारण भी कहीं न कहीं बढ़ती आबादी है। बढ़ती आबादी के कारण ही प्रकृति का संतुलन बिगड़ रहा है।

बेरोजगारी हो या भ्रष्टाचार, अराजकता हो या आतंकवाद, निरक्षरता का हो या फिर सामाजिक समस्या इन सभी का मूल कारण आज हमारी बढ़ती जनसंख्या है। जनसंख्या कम होने पर ये स्वयं ही हल हो जाएंगी। भारत जनसंख्या के आधार पर दूसरे स्थान पर है। यदि इस समय जनसंख्या वृद्धि पर नियंत्रण नहीं किया गया तो यह आबादी अगले कुछ वर्षों में चीन से अधिक हो सकती है। जनसंख्या में होने वाली इस बेहिसाब वृद्धि के पीछे कई कारण है। हमारे यहां शिक्षा का अभाव है शिक्षित न होने के कारण लोग परिवार नियोजन का महत्व नहीं समझ पाते और इसी अज्ञानता के कारण आज हमारा देश एक बहुत बड़े संकट में हैं।

भारत में आज भी कुछ जगहों पर विवाह छोटी आयु में होते हैं और हमारे यहां विवाह करना भी जरूरी समझा जाता है। परिवार में लड़का होना जरूरी समझने के कारण कई संतानों की लाइन लगा दी जाती हैं। आज के इस दशक में लड़का-लड़की के बीच यह भेदभाव बहुत ही शर्मनाक सोच है। यदि घर में लड़की पैदा हो जाए तो बहुत घरों में मातम छा जाता है वहीं अगर परिवार में लड़का पैदा हो जाए तो जशन मनाते हैं, घर-घर मिठाइयां बांटते हैं, खुशी मनाते हैं। लड़की को दूसरे के घर का समझ कर उसे शिक्षित नहीं किया जाता। वहीं लड़के को पढ़ाने के लिए बड़े-बड़े कॉलेज और शहरो में भेज देते हैं। भारत जैसे देश में आज भी छोटे-छोटे गांवो में पिछड़े परिवारों में ऐसा होता है। न तो परिवार स्वयं शिक्षित होता है और ने बच्चों को शिक्षित कराते हैं। आज इसी अज्ञानता के कारण देश बहुत बड़े संकट में है और आने वाले समय में और भी संकट ला सकता है। 

भारत विश्व की सबसे पुरानी सभ्यताओं में से एक है। जिसमें बहुरंगी विविधता और समृद्ध संस्कृति विरासत है। इसके साथ ही यह अपने आप को बदलते समय के साथ ढालती भी आई है। आजादी के बाद भारत ने बहुआयामी, सामाजिक और आर्थिक प्रगति की है। मगर जनसंख्या वृद्धि के कारण आज स्वतंत्र स्वतंत्रता प्राप्ति के 7 दशक के बाद भी भारत की लगभग 40% जनसंख्या गरीबी रेखा के नीचे है। उन्नति एवं देश के विकास का पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा। निरक्षरता एवं कुपोषण की समस्या से छुटकारा नहीं मिल पा रहा। भुखमरी, निर्धनता, बेकारी, भिक्षावृत्ति तथा अन्य आर्थिक एवं सामाजिक समस्याओं से छुटकारा तभी मिलेगा जब हम जनसंख्या वृद्धि पर नियंत्रण रखेंगे। अन्यथा हम विकास एवं प्रगति से होने वाले लाभों से वंचित रह जाएंगे। 

स्वतंत्र भारत में दुनिया का सबसे पहला जनसंख्या नियंत्रण हेतु राजकीय अभियान वर्ष 1951 में आरंभ किया गया था किंतु इससे सफलता नहीं मिल सकी। वर्ष 1975 में आपातकाल के दौरान बड़े स्तर पर जनसंख्या नियंत्रण के प्रयास किए गए। इन प्रयासों में कई अमानवीय तरीको का उपयोग किया गया। इससे न सिर्फ यह कार्यक्रम असफल हुआ बल्कि लोगों में नियोजन और उसकी पद्धति को लेकर भय का माहौल उत्पन्न हो गया जिससे कई वर्षों तक जनसंख्या नियंत्रण के प्रयासों में बाधा उत्तपन हुई। वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार भारत की आबादी 121 करोड़ थी। साथ ही वर्ष 2030 तक भारत की आबादी चीन से भी ज्यादा होने का अनुमान है। ऐसे में बढ़ती जनसंख्या भारत के सामने एक बड़ी चुनौती है क्योंकि जनसंख्या अनुपात में संसाधनों की वृद्धि सीमित है। 

जनसंख्या वृद्धि : एक विकट समस्या, और कई और समस्याओं का कारण
जनसंख्या विस्फोट

किसी भी देश में जब जनसंख्या विस्फोट की स्थिति में पहुंच जाती है तो संसाधनों के साथ उसकी गैर अनुपातित होने लगती है। इसलिए हमें स्थिरता लाना जरूरी होता है। इसी स्थिति को संबोधित करते हुए भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर इस समस्या को दोहराया था। हालाँकि जनसंख्या वृद्धि ने कई चुनौतियों को जन्म दिया है किंतु उसके नियंत्रण के लिए कानूनी तरीका एक उपयुक्त कदम नहीं माना जा सकता। भारत की स्थिति चीन से पृथक है तथा चीन के विपरीत भारत एक लोकतांत्रिक देश है जहां हर किसी को अपने व्यक्तित्व जीवन के विषय में निर्णय लेने का अधिकार है। भारत में कानून का सहारा लेने के बजाय अभियान शिक्षा के स्तर को बढ़ाकर तथा गरीबी को समाप्त करने जैसे उपाय करने चाहिए।

महिलाओं की आर्थिक स्थिति में सुधार तथा उन्हें निर्णय लेने की प्रक्रिया में शामिल करना होगा। शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार लाना होगा, लड़का-लड़की के बीच भेदभाव को समाप्त करना होगा और परिवार नियोजन की स्थिति को समझना होगा। भारत में अनाथ बच्चों की संख्या अधिक है तथा ऐसे भी परिवार हैं जो बच्चों को जन्म देने में सक्षम नहीं है ऐसे परिवार को बच्चा गोद लेने के लिए प्रोत्साहित करना होगा। इस प्रकार से न केवल अनाथ बच्चों की स्थिति में सुधार होगा, बल्कि जनसंख्या को भी नियंत्रण किया जा सकेगा।

जनसंख्या नियंत्रण के लिए सरकार के साथ स्वयंसेवी संस्थाओं और आम जनता को भी पूर्ण सहयोग देना चाहिए। जनसंख्या नियंत्रण ठीक से लागू हो तो इससे रोजगारी उपलब्ध होगी वही बढ़ती आबादी के कारण संक्रामक बीमारियां भी नहीं फैलेंगी। बेहतर होगा अगर हम सरकार द्वारा चलाए गए अभियान में उनका पूर्ण रुप से सहयोग करें। इससे न केवल जनसंख्या वृद्धि में कमी आएगी बल्कि देश की आगे बढ़ेगा और समाज में आपसी सद्भाव और प्रेम भी बना रहेगा।

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