कही बत्ती गुल तो कही नेटवर्क कवरेज नहीं लेकिन पढ़ाई ऑनलाइन कराएंगे - सरकारी तंत्र

आप अगर कहीं ग्रामीण क्षेत्र में रहते है और चाहते है कि ऑनलाइन पढ़ाई करले तो जनाब दिन में सपने देखना छोड़ दीजिये । क्योकि सरकारी तंत्र आपकी आवाज़ को घंटा सुनता है जी अपने सही पढ़ा है । लॉकडाउन के बाद से सभी लोगों का काम ऑनलाइन होना शुरू हो गया है लेकिन सरकारे हमारी वही आज भी ढीले रवैये से बाज आने को तैयार नहीं हैं।

क्लासेस ऑनलाइन जरूर होंगी लेकिन उसके लिए आपको किसी बड़े नेता के द्वार पर जाकर उनके घर पर बंदोबस्त करना होगा । क्योकि आम नागरिकों के घर पर आज भी बिजली उपलब्ध उतनी ही होती है जीतने में आपका काम हो जाए। और नेटवर्क का तो हाल इतना बुरा है कि जनाब पूछना ही बेकार है ।

मुख्य 2 समस्याएँ क्या हैं –

  1. बिजली
  2. नेटवर्क
कही बत्ती गुल तो कही नेटवर्क कवरेज नहीं लेकिन पढ़ाई ऑनलाइन कराएंगे - सरकारी तंत्र

बिजली

जहां दुनिया आकाश छूने की बात करती है कहीं आज आकाश पर जाने की सोच रही , हमारे देश की सच्चाई है आज भी ग्रामीण इलाको में बिजली आपूर्ति ढंग की नहीं है, कहीं तार जर्जर है तो कहीं तार का नामो निशान नहीं है । जिन जन प्रतिनिधियों को हम चुन कर भेजते है जनाबो को अपने पॉकेट भरने से फुर्सत नहीं है वो समस्या क्या खाक सुनेंगे । जब बिजली ही नहीं होगी तो ऑनलाइन पढ़ाई आप कैसे करेंगे ।

नेटवर्क

दुनिया 5G नेटवर्क की तैयारी में जुटी है हमारे देश का हाल आज भी इतना बुरा है कि नेटवर्क के मामले में कि उसका कोई जवाब ही नही है । प्राइवेट कंपनियो की बात ही छोड़ो । गवरमेंट टेलीकॉम कंपनियो का इतना बुरा है कि जनाब आप उनसे ब्रॉडबैंड कनैक्शन लेने के लिए तरस जाएंगे लेकिन उनका कोई जवाब नहीं आयेगा । आपको बोला जाएगा आप ऑनलाइन अप्लाई करो । सेल्स टीम कॉल करेगी । महीनो ऐसे ही बीत जाएंगे, कोई कॉल नहीं आयेगा ।

आप उनके ऑफिस पर जाएंगे पहले तो साहब कर्मचारी नहीं मिलेंगे और मिल भी गए तो सुनेंगे नहीं । सुन लिया तो काम नहीं करेंगे । उल्टा आपसे ही बोलेंगे अगर कनैक्शन चाहिए तो पैसे दो तार बिछवा देता हूँ । और तो और ये न तो मेल का रिप्लाई देते है न ही सोशल मीडिया पर टैग करने पर बोलते है। आधे से ज्यादा वेबसाइट पर इनके नंबर बंद पड़े मिलेंगे । कोई लग भी गया तो आपको सोल्यूशंस मिलेगा इसका 1 % भी चान्स नहीं है और इनकी कम्पलेन करने के लिए इन्ही के ऑफिस में जाकर उनके द्वारा ही करनी होगी ।

गरीब का बच्चा अगर मोबाईल या लैपटाप कही से जुगाड़ भी करले तो बिजली और नेटवर्क लेना उसके लिए बहुत बड़ा पंगा है। और अंत में यही कह सकते हैं, भ्रस्ट सिस्टम से उम्मीद करना ही बेकार है । बात करे अगर वर्क फ़्रोम होम वाले सिस्टम की तो गाँव, देहात और छोटे कस्बो की तो प्राइवेट कर्मचारी भी नेट और बिजली की समस्या से परेशान है। उम्मीद करते है ये आर्टिक्ल कोई जिम्मेदार व्यक्ति पढ़ रहा हो तो वो इन समस्याओ का संग्यान लेगा।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here