पद्म श्री से सम्मानित लोक गायिका मालिनी अवस्थी जी जिन्होंने लोक गीतों को अगली पीढ़ी तक पहुंचाया हैं।
इमेज सोर्स : मालिनी अवस्थी जी का फेसबुक वॉल

सदियों से हिंदुस्तान की परम्परा रही है कि हर मौके को एक गीत के रूप में संजोया जाए और उसे प्रस्तुत किया जाए और इसका अगर आज भी कोई निर्वहन करता है तो वो है हमारे लोक गायक ।

लोक गायिका का अगर हम संदर्भ लेे तो आज उत्तर प्रदेश की धरती से एक नाम हमें जरूर दिखता है जिसे हमारे महामहिम राष्ट्रपति द्वारा सम्मान भी दिया गया । जिन्होंने अपने गायन कला से आज लोक गीतों को हर उस जगह पहुंचाया है जहां पर हमारी संस्कृति खो चुकी थी ।

हम बात कर रहे है मृदु भाषी मालिनी अवस्थी जी की । जिन्हें भारत सरकार द्वारा पद्म श्री से नवाजा गया । जिन्होंने ने भोजपुरी, अवधी, बुन्देली जैसे क्षेत्री भाषाओं को और उनकी परम्परागत गीतों को संजोकर आने वाले पीढ़ियों के लिए रखा ही नहीं बल्कि इन भाषाओं को उचित सम्मान भी दिलवाय है।

आज के दौर में जहां हमारी परम्पराओं के वो गीत खो सी गई है वहीं मालिनी अवस्थी जी द्वारा इन्हे आज फिर से एक उचित स्थान दिलवाया है संगीत और लोक गायन के क्षेत्र में मालिनी अवस्थी जी का योगदान सभी के लिए प्रेरणा दायक है ।

मालिनी अवस्थी जी का जन्म 11 फरवरी 1967 को उत्तरप्रदेश के कन्नौज में हुआ । उन्होंने लखनऊ के भातखंडे संगीत संस्थान से शिक्षा प्राप्त की। वह बनारस की पौराणिक हिंदुस्तानी शास्त्रीय गायका गिरिजा देवी जी की शिष्यया हैं।

उनका संगीत के क्षेत्र में 30 सालो से भी ज्यादा का अनुभव है । उन्होंने ठुमरी और कजरी को भी सजीव कर दिया जो बिल्कुल ही ख़तम हो चुकी थी । लोक गायन के क्षेत्र में मालिनी अवस्थी जी का योगदान बहुत ही सराहनीय है ।

उन्हें यश भारती उत्तरप्रदेश , सहारा अवध सम्मान, नारी गौरव और कालिदास सम्मान भी मिल चुका है । उन्होंने हाल ही में एक लोक गीत भी गाया जो बहुत लोगो को पसंद आया जिसका शीर्षक है बाबा निमिया के पेड़

Global Khabari सम्मान करता है हर उस लोक गायक का जिन्होंने हमारी संस्कृति और परंपराओं को आगे बढ़ाया है और आने वाली पीढ़ियों को उपहार स्वरूप दिया है ।

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