मेरी नजरों में गांधी
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सही मायने में आज का हिंदुस्तान महात्मा गांधी की जयंती नहीं मना सकता। गांधी को जीते जी कई बार मारा गया और मरने के बाद गांधी के एहसासों को, गांधी के सपनों को तार-तार कर दिया गया। गांधी को हिंदू ठेकेदार मुस्लिम समर्थक समझते थे और मुस्लिम ठेकेदारों का आरोप था कि गांधी हिंदूवादी है।

युवा नाराज था कि गांधी ने भगत सिंह को नहीं बचाया। गांधी पर आरोप लगे कि गांधी मुल्क के टुकड़े-टुकड़े चाहते थे। जब तक जीवित रहे तब तक गांधी को बातों से मारा गया और अंत में एक संगठन ने गांधीजी के छाती पर गोली मारकर गांधी युग का अंत कर दिया।

गांधी के इशारों पर हिंदुस्तान चलता था पर गांधी ने कभी विश्वासघात नहीं किया। गांधी कभी बिके नहीं। विरोध करने वाले लोग इस बात को भूल जाते हैं कि हिंदुस्तान में पद उपाधि और पैसों पर भी लोग बिक जाया करते हैं। इंग्लैंड और अफ्रीका में पढ़ाई करने वाला, हिंदुस्तान में जब तनभर कपड़े नहीं थे उस वक्त में कोट-पैंट पहनने वाला बैरिस्टर गरीबी को देखकर पूरी जिंदगी मात्र एक धोती पर गुजार देता है। उसके मरणोपरांत भी आलोचना मिलती है तो यह हमारे लिए शर्म की बात है।

गांधी को लोगों द्वारा दर्द मिला यह दर्द का विषय नहीं है दर्द का विषय है कि गांधी की अवधारणा को हिंदुस्तान के लोगों ने खंजर मार दिया। गांधी ने जितनी अवधारणा व्यंजीत की वह सभी आज धाराशाही है। गांधी ने स्वतंत्रता के लिए लड़ाई लड़ी, गांधी ने अहिंसा से लड़ाई लड़ी। गांधी ने सत्य के लिए, स्वराज के लिए, सभ्यता, संस्कृति के लिए, मानवता के लिए, सर्वधर्म समभाव के लिए, नैतिकता के लिए लड़ाई लड़ी पर आज गांधी की एक-एक अवधारणा हिंदुस्तान के अंदर ध्वस्त हो चुकी है।

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महात्मा गांधी ने कहा था कि जिंदगी का एक भी क्षण ऐसा नहीं है, जिसमें आदमी सेवा नहीं कर सकता । गांधी जी ने जनता की सेवा को देश सेवा बताकर पूरी जिंदगी सेवा में बिता दिया। पर उसी गांधी के मुल्क में सेवा की सदरी पहने तस्कर, घूसखोर, चोर उचक्के घूम रहे हैं। पूरे मुल्क में सेवा भाव पतन पर है।

गांधी ने कहा था कि हिंदुस्तान को देखना है तो हिंदुस्तान के गांव में घूमिए । आज गांव में निंदा, नशा, चोरी, अश्लीलता, गंदगी के अलावा कुछ भी नहीं बचा है। क्या यही गांधी का गांव है? गांधी ने कहा था कि देश की सेवा का तात्पर्य जनता की सेवा है जनता को सवर्ण ,पिछड़ी, और दलित के चश्मे से देखने वाले इस बात को कैसे समझ सकते हैं।

गांधी ने कहा सत्य ईश्वर का पर्याय है झूठ की बैसाखी पर एक स्वस्थ समाज नहीं टिक सकता ।नैतिकता सत्य के साथ जुड़ा है। आज हिंदुस्तान में नैतिकता और सत्य पूर्ण रूप से ध्वस्त है। गांधी जी ने कहा जिन्होंने अंग्रेजी पढ़ ली है, उन्हें चाहिए कि अपने बच्चों को पहले सदाचार और अपनी भाषा सिखाए, फिर हिंदुस्तान की एक दूसरी भाषा सिखाए। हिंदुस्तान में भाषा के नाम पर अंग्रेजी ही महत्वपूर्ण है। अर्थात हर तरह से हिंदुस्तान ने गांधी को नकारा है।

महात्मा गांधी के वक्त हिंदुस्तान नैतिकता, सत्य और अहिंसा केंद्रित था, पर आज हिंदुस्तान गांधी का नहीं मुलायम, ममता, मायावती और मोदी का है ।आज हिंदुस्तान का केंद्र जाति ,धर्म और धन है। जहां आखिरी व्यक्ति दुर्बल और दीन है, नजरअंदाज है। किसान कर्ज के बोझ से मर रहा है। विकास के नाम पर किसानों को विस्थापित किया जा रहा है। जहां स्त्रियां असुरक्षित है। जहां लड़कियां बलात्कार और अत्याचार की शिकार है। जहां राजनीतिक का अर्थ व्यापार है। जहां हर व्यक्ति के अंदर एक दूसरे के प्रति नफरत है। जहां अर्थ केंद्रित संस्कृत चरम पर है। जहां तमाम प्रकार की असमानताएं हैं। वो मुल्क गांधी का नहीं हो सकता , वहां गांधी को पूजना दुस्साहस है। वहां गांधी जयंती पर सिर्फ शर्मसार हुआ जा सकता है।

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