कौन है ये भक्त, चमचा और न्यूट्रल इंसान।
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देश आज कुछ महत्वपूर्ण इंसानो में बंट गया है, कोई भक्त, कोई चमचा और कोई न्यूट्रल बना बैठा है । वैसे तो सभी (मीडिया) इस पर बात करने से कतराते है लेकिन एक मीडिया प्लेटफॉर्म ऐसा है जो आजकल किसी भी हर मुद्दे पर खुल कर बात करता है भले उससे कई लोगों के घर जल जाए , बर्बादी हो जाए और नुकसान हो जाए – उस प्लेटफॉर्म का नाम है सोशल मीडिया ।

अभिव्यक्ति की आजादी बोल, देश के साथ खेलवाड़ करना । अपनी पॉलिटिक्स चमकाना और धर्म, जाति और इंसानियत को बांट कर फर्स्ट क्लास एसी में सोना , लोगों को लड़ा कर अपने को दूसरों का हितैषी बोलने वाले लोग पता नहीं कौन है। हर सफ़ेद पोष अगर सही है तो जो घटनाएं देश मे चल रही है उनका जिम्मेदार कौन है ? क्यूं की सफ़ेद पोष का जब तक काले रंग से मेल न होगा तब तक ये घटनाएं नहीं होंगी ।

आज कल अगर आपको अपनी रिलेशनशिप में दरार लानी हो तो किसी भी अपने खास से राजनीतिक मुद्दों पर बात करना शुरू कर दो । बाकी सारा काम आपके और आपके रिलेटिव के विचारधाराएं कर देंगी । एक दूसरे के मन में भक्त और चमचा नाम की कैटेगरी जरूर क्रिएट हो जाएगी । और ये चांसेस तब और ज्यादा हो जाते है जब दोनों आंखें बंद करके किसी विचारधारा को सपोर्ट करते हैं।

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वैसे हमें स्पष्ट करने की जरूरत नहीं है कि किस को क्या बोला जाता है। और न ही हम उनमे से किसी के प्रिय हैं लेकिन अगर राजनीति को विचारधारों के चश्मे से देखा जाए तो ये संभावना ज्यादा है कि आप एक सच्चे और अच्छे भविष्य के निर्माण में अपना कदम रख सकते हैं ।

वैसे भक्त, चमचा और न्यूट्रल का भावार्थ बहुत ही अलग है लेकिन रहिमन इस संसार में भाँति भाँति के लोग । जिसको जैसा मन किया उस शब्द से अपने आप को जोड़ लिया या फिर लोगों ने जोड़ दिया । आंखे खोल कर और किसी भी पार्टी का चश्मा उतार कर अगर सभी चीज़ें देखें तो शायद जो आए दिन वार छिड़ जाता है पार्टीवाद का वो खतम हो जाए । बाकी आपकी मर्ज़ी है आप क्या कहलाना पसंद करोगे किसी का भक्त, किसी का चमचा और या फिर न्यूट्रल ।

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